चारों हिंदी प्रदेशों के एक्ज़िट पोल के कयास जो बतला रहे हैं ,वे सत्ता विरोधी गुस्से का प्रतिफलन ज्यादा है , उसमें नमो को मुफ्त का यश मिलने से नहीं रोका जा सकता । सच तो सत्ता विरोधी लहर ही है । वह जहां कांग्रेसी सत्ता के विरुद्ध है वहीं भाजपा के भी । किन्तु यदि इसका फायदा सिर्फ भाजपा को ही मिलता है तो सन्देश में मोदी का नाम जोर-शोर से प्रचारित किया जायगा ।दिल्ली में जहां अति-नया विकल्प खड़ा हुआ , वहाँ वह अपना रंग दिखा रहा है । इसका मतलब यह हुआ कि यदि जेनुइन जन-हृदय स्पृशी- तीसरा विकल्प होता तो आज अन्य प्रदेशों में भी बात बदली हुई होती ।
Wednesday, 4 December 2013
Tuesday, 3 December 2013
Monday, 2 December 2013
खराब जो भी होता है , वह खराब ही होता है चाहे फिर वह कविता हो या आलोचना ।खराब कविता से खराब आलोचना लिखी जाती है और खराब आलोचना से खराब कविता की पैदावार बढ़ जाती है । खराबी एक संक्रामक रोग की तरह होती है । जैसे समाज का जातिवाद और सम्प्रदायवाद राजनीतिक तंत्र और सत्तास्वरूपों को अपने जैसा बना देते हैं ।रावण अपने राज्य को भी अपने जैसा ही रहने की कुबुद्धि का प्रसार करता है ।
Sunday, 1 December 2013
वह मतदाता बधाई का हक़दार है , जो लोकतंत्र की प्रक्रिया में स्वप्रेरणा से भागीदार बना है । इसी वजह से कल राजस्थान विधान सभा के गठन के लिए जिस तरह उमंग-भाव से मतदान हुआ ,वह इतिहास के एक मील-प्रस्तर की तरह बन गया । इस बार हर बार से अधिक ७४ प्रतिशत से अधिक मतदान होने के कई मायने निकल रहे हैं , सही बात तो परिणाम ही बतलायेंगे किन्तु इतना जरूर है कि वे चौंकाने वाले हो सकते हैं ।बहरहाल, लोकतंत्र की प्रक्रिया में लोक की भागीदारी का बढ़ना स्वागत योग्य है । निर्वाचन विभाग की व्यवस्थाएं ,प्रचार तंत्र , विकसित होती राजनीतिक प्रक्रिया , सत्ता पाने की लालसा -आकांक्षा ,जाति -सम्प्रदायों की अपने नेता चुनने की संकीर्ण सोच वाली ध्रुवीकृत एकजुटता, नए मतदाताओं की सक्रियता , पार्टीगत मनोरचना आदि की भूमिका से जो माहौल बना , उसने मतदाता को उत्साहित करते हुए पोलिंग बूथ तक पहुचाया । यह शुभ संकेत है जो आगे राजनीतिक प्रक्रिया को और सुदृढ़ करेगा , ऐसा माना जा सकता है ।
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